गोड़से पर बनी फ़िल्म मैं देखा, जानने की कोशिश किया कि ये कौन है, क्या इसके कुछ वाकई देश हित में नेक इरादे थे या सिर्फ़ पापुलर होना था 

30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे नामक व्यक्ति ने महात्मा गांधी जी को गोली मारकर हत्या की थी। इस केस की सुनवाई दिल्ली की विशेष अदालत में न्यायमूर्ति आत्माचरण की बेंच ने की। ये एक खुली अदालत थी यहां से मामला फेडरल कोर्ट में जाता था। गोडसे गोड़ तक का बल लगाकर चिल्ला–चिल्ला कर कह रहा था कि गांधी को मेरे दोस्तों ने नहीं मैंने अकेले मारा है, इसका क्रेडिट सिर्फ़ और सिर्फ़ मुझे दिया जाना चाहिए। ताकि इतनी बड़ी शख्सियत को मारा हूं तो इतिहास में मेरा नाम भी इनके नाम के साथ लिया जाए।
गांधी का हत्यारा इसके अलावा क्या परिचय है गोडसे का? किसी आजादी आंदोलन में दिखा? कोई आंदोलन खुद किया? किसी अंग्रेज को मारा? कोई आजादी की कीमत दी? इन सबका जवाब न ही आएगा।
इसको और इसके दोस्त नारायण आप्टे को फांसी की सजा सुना दी गई। दोनों कोर्ट ने मौत की सजा सुनाई लेकिन आज भी ये जीवित कैसे है? ये तो उसी अंबाला जेल में निस्तानबूत हो जाना चाहिए था फिर आज भी क्यूं जिन्दा है? ये तो देश की अदालत की अवमानना ही है कि गांधी जयंती के दिन गोडसे सोशल मीडिया में ट्रेंड करता है। और वो अवमानना अभी भी होती आ रही है, देश की कोर्ट ने गुरमीत राम रहीम को रेपिस्ट घोषित किया लेकिन अभी भी उसके अनुयायी इतने हैं कि एक राज्य के चुनाव के नतीजें उस पक्ष में हो जाएं जिस पक्ष में रेपिस्ट राम रहीम का आशीर्वाद शामिल हो जाए।
गोड़से ने जो अदालत में अपनी दलीलें दी कि उसने महात्मा गांधी जी को क्यूं गोली मारी, उसे इस मूवी में दिखाया गया, जिसमें उसकी दलीलें एकदम च*तियाफ़ा और सेंसलेस थीं।
गोडसे ने कहा कि गांधी जी ने भारत का एक हिस्सा जिन्ना को दे दिया। हमने तो अखंड भारत चाहा था। अंग्रेजों से जब तक आजाद नहीं हुए तब तक तो अखंड भारत ही था जिसमें कांग्रेस और मुस्लिम लीग दोनों ने अहम भागीदारी निभाई, गोडसे ने क्या किया था? इसने कौन सा प्रोविंस या रियासत को जोड़ने में योगदान दिया था।
गोडसे ने कहा कि जब विभाजन हुआ तो मैं देख नहीं पा रहा था कैसे लोग भूखे, प्यासे, नंगे इधर से उधर जा रहे थे, ट्रेनों में बैठे थे कुछ पैदल जा रहे थे। जब बंटवारा होता है तो ये दिक्कतें आना स्वाभाविक है लेकिन ये गोडसे तब कहां था जब जलियांवाल हत्या कांड हुआ था, उसके बदले इसने क्या जिम्मेदारी निभाई?
जब जिन्ना ने एक्शन डे बोला कितने ही हिन्दू भाइयों की मृत्यु हुई थी, सड़कों में खून–ही–खून बह रहा था और ये एक्शन डे पता नहीं कब तक चलते रहेगा और कब तक जानें जाती रहेंगी इसलिए ये मौतों से अच्छा था, देश का विभाजन।
गोड़से ने कहा कि बंटवारा गांधी जी ने ही कराया था जिससे मेरी मातृभक्ति को ठेस पहुंचा इसलिए मैने गांधी को गोली मारी, ऐसे–ऐसे गोडसे के बचकाने बयान हैं। मतलब व्यक्तिगत दिखावटी देशभक्ति करके इतनी बड़ी शख्सियत को मारना मूर्खता ही है। मूर्खता नहीं, ये सिर्फ इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज कराने की निंजा टेक्नीक थी।
गोडसे बोलता है कि 55 करोड़ रुपए पाकिस्तान को क्यूं दिए? बकलोल को पता होना चाहिए था कि जब अपने घर का विभाजन होता है तो दोनों तरफ अपने ही लोग होते हैं। जिनका घर रेडक्लिफ रेखा के उधर रह गया वो कैसे अपना जीवन जिएंगे या वहां कैसे सब सेटल होंगे? एक राष्ट्रपिता होने के नाते ये फ़र्ज़ तो बनता ही था कि उनको संभलने में ये मांग जायज थीं। आज कौन जानता है बिन्त सिंह, सतवंत सिंह को? कौन जानता है देनमोजही राजरत्नम को? कौन जानता है अब्दुल राशिद को? कौन जानता है लवलेश, मोहित, अरुण मौर्य को? ये भी तो क्रमशः इंदिरा गांधी को, राजीव गांधी को, स्वामी श्रद्धानंद को, अतीक अहमद को मारे हैं न। जब इनको इतिहास में ही दबा कर रखा गया तो पापी गोडसे को क्यों जिंदा रखा गया?
महात्मा गांधी गलत हो सकते थे। उसका नतीजा ये तो नहीं होना चाहिए था कि मारने वाले को अमर कर दिया जाए जिसे कोर्ट ने फांसी दी हो। गोड़से को सिर्फ़ और सिर्फ़ पापुलर होना था। जो आज किसी महापुरुष की हत्या करके, मरकर भी जिंदा है। ये देश का दुर्भाग्य है कि उसका इतिहास ऐसे बयां हो रहा। आज खूनी को अमर कर रहे। विचारों में असमानता थी लेकिन सुभाष चंद्र बोस जी ने तो ऐसा कुकृत्य नहीं किए, बाबा साहब आंबेडकर ने तो ऐसा नहीं किया। क्या ये गोड़से इनसे बड़ा देशभक्त था? मुझे तो लगता है ये जिन्ना का आदमी था।
ये हत्यारा था और इसे देश की कोर्ट ने इसे सजा–ए–मौत दी हैं। “गोड़से जिंदाबाद बोलना“ को देशद्रोही मानना चाहिए और इसके लिए कड़ा क़ानून बनाना चाहिए ताकि देश की कोर्ट के जजमेंट का उल्लंघन को रोका जा सके और हमारे आदर्शों, महान विभूतियों की गरिमा को अछूत रखा जा सके।
एक सच्चा और देशभक्त वो है जो अपने संविधान को सर्वोपरि मानता है। संविधान के भाग IV(A) में अनुच्छेद 51(A)-2 में हमारे स्वतंत्रता संग्राम में शामिल महापुरुषों के आदर्शों को पालन करने की जिम्मेदारी दी गई है।
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▶गांधी हत्या कांड
▶महात्मा गांधी हत्या इतिहास
▶नाथूराम गोडसे गांधी मर्डर
▶Gandhi murder case in Hindi
▶30 जनवरी 1948 गांधी वध
▶Gandhi assassination facts
▶नाथूराम गोडसे का पक्ष
▶Gandhi vs Godse विचारधारा
▶Gandhi murder court case
▶Gandhi vadh ka sach
▶ Essay on Gandhi Jayanti








