फुलझड़ी से उसने पटाखे जलाई
आपको दिवाली की हार्दिक बधाई
अक्तूबर नवंबर के महीने में आने वाला ये दीवाली का त्योहार हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी खुशी का प्रकाश लेकर, सभी तरफ उजारा लिए, घरों में उजाला पसारे, नए नए कपड़ों की सौगात लिए आ गया है।
दीवाली दीपों का पर्व है और इसी पर्व से हल्की हल्की ठंड की सुगबुगाहट होने लगती हैं और कुछ मीम भी सोशल मीडिया में बहने लगती हैं ठंड से बचने के उपाय से लेकर बिना पानी का इस्तेमाल किए नहाने की खोज। फिर गूगल उनकी मदद में बताता है कि कैसे दो बूंद पानी से नहाया सा महसूस कर सकते हो। बाकी इंजीनियरिंग के छात्रों के लिए ये तकनीक नई नही इजात होती वो इसका इस्तेमाल लंबे समय से करते आ रहे हैं।
दीवाली में नए नए कपड़े पहनने का रिवाज वैसे ही नत्थी है जैसे दीपों का दीवाली से, पटाखों का दीवाली से, आग का बाती से।
इस लिए ये दीवाली सभी के लिए एक जैसी नहीं होती। हर तपके के लोग अपनी सुविधा अनुसार दीवाली मनाते हैं।
उच्च वर्ग के लिए अलग दीवाली है, मध्यम वर्ग के लिए मध्यम वर्गीय दीवाली और निम्न वर्ग के लिए रोज की तरह दीवाली का दिन भी जाता है।
जब से चाइनीज समान ने दीवाली पर अपना आधिपत्य जमाया है तब से भारतीय कुम्हारों की हस्त कला को प्रभावित कर दिया।
जिसका साक्ष्य प्रमाण ये होता है कि दीवाली के एक दिन पहले ये सोशल मीडिया में कंपेन चलाना पड़ता है कि दीवाली में मिट्टी के दिए ही खरीदे, रोड़ में बेंच रहे लोगों का सामान खरीदें।
दीवाली के इस पर्व में कुछ शायरी ले कर आए है, जिनका इस्तेमाल दीवाली विश करने में कर सकते हैं
दीपों का त्योहार है प्यारे
गाओ मंगल आरती बिना थके हरे
जिससे मां लक्ष्मी द्वार आपके पधारे
मिट्टी का दीप जहां जल गए
समझो कई पेट पल गए
सारा घर रोशनी से जगमगा रहा
परदेशी घर को लौट के जा रहा
दिवाली में ढेरों नए कपड़े भर कर
वो खुशियों को बांटने आ रहा
दिवाली की रात, रात नहीं होती
जब तक पटाखों की बरसात नहीं होती
रोड़ किनारे बिक रहे दिए को लेकर
किसी के घर का दीया जला दो
दिवाली की आ रही बधाइयां
तरह तरह की साथ में मिठाइयां
अंधेरा दिखे नहीं कहीं पर
बस बन रही खुशी की परछाइयां
मां लक्ष्मी का पैर अंगद सा टिकाओ
घर को बिल्कुल मंदिर सा सजाओ
गरीबों की रोटी से भरी न हो तिज़ोरी
ऐसे तिजोरी के ऊपर एक दीया जलाओ
माना अंधेरा घना है
पर दीया जलाना कहां मना है
अंधेरे से जुगनू न हारा है
बिना जलाए बाती दीया कहां बना है
दिए में तेल भरो, भरो रंगो से रंगोली
प्रकाश जीवन में लाओ, बोलो मिसरी सी बोली
दिन है प्रकाशित मगर रात है काली
दिए जलाकर मनाओ दीवाली
लक्ष्मी को दीवाली में मत आजमाना
लक्ष्मी यदि आजमाई तो पड़ेगा सब गंवाना
इसलिए छलरहित पैसे मेहनत से कमाना
लक्ष्मी को खुश यदि घर में है पाना
हवा में न बुझे, जाके आसमान में तारों में टिमटिमाए
इस दीवाली मेरा दिया सोया भाग्य जगा जाए
दीवाली का ये प्रकाश, देता है ये आस
बदले में नहीं बदलने में रखो विश्वास
एक फुलझड़ी में कितने अलग अलग रंग होते है
जिन्दगी की तरह














