वो न आए उनकी याद वफा कर गईं
उनसे मिलने की चाह सुकून तबाह कर गईं
आहट दरवाजे की हुई तो उठकर देखा
मजाक हमसे हवा कर गईं
वो कहते हैं हम तुम्हारे है
हम कहते है हम तुम्हारे है
जिंदगी इसी तरह गुजरती गई
बने हम एक दूसरे के सहारे हैं
मुझे मालूम है कि कुछ रास्ते ऐसे भी है
जो कभी मेरे मंज़िल तक तो नहीं जाते
फिर भी मैं चलता हूं क्योंकि
उस राह में कुछ अपनो के घर भी आते हैं
बेहोशी में भरता रहा मैं, जिन्दगी में रंग
जब होश में आया तो लकीरों के सिवा कुछ न था
ख़्वाब भी तो सारे के सारे झूठे निकले
सिर्फ मैले नतीजों के सिवा कुछ न था
मैं सब कुछ और तुम कुछ भी नहीं
बस यही सोच, हमें इंसान नहीं बनने देती
सम्मान हमेशा समय का होता है
लेकिन आदमी उसे अपना समझ लेता है
दिल पे क्या गुजरी वो अनजान क्या जानें
प्यार किसे कहते हैं नादान क्या जाने
हवा के साथ उड़ गया घर इस परिंदे का
कैसे बना था घोंसला वो तूफ़ान क्या जाने
न जानें क्यों वो हमसे मुस्कुराकर मिलते हैं
अंदर के सारे गम छुपाकर मिलते हैं
वो जानते हैं शायद कि नज़रे सब बोलती हैं
इसलिए वो हमसे नज़रे झुका के मिलती हैं
महफ़िल में कुछ तो सुनाना पड़ता है
गम छुपा कर मुस्कुराना पड़ता है
कभी हम भी उनके अजीज़ थे
आजकल ये भी उन्हें याद दिलाना पड़ता है
इश्क़ कभी भी पुराना नहीं होता
इश्क़ जैसा कोई दीवाना नही होता
इश्क़ रखता है जवां दिलो को हमेशा
इश्क़ में उम्र जैसा पैमाना नहीं होता
तुलना के खेल में मत उलझो
क्योंकि इस खेल का कहीं कोई अंत नहीं
जहां तुलना की शुरुआत होती है
वही से आनंद और अपमान खत्म होता है
चार दिन की जिन्दगी है हंसी खुशी में काट ले
मत किसी का दिल दुखा दर्द सबका बांट ले
कुछ नही है साथ जाना एक नेकी के सिवा
कर भला होगा भला गांठ में ये बांध ले
बिकता है गम हंसी के बाजार में
लाखों दर्द छिपे होते हैं एक छोटे से इंकार में
वो क्या समझ पाएंगे प्यार की कशिश
जिन्होंने फर्क ही नहीं समझा पसंद और प्यार में
कुछ गहरा सा लिखना था, इश्क़ से ज्यादा क्या लिखूं
कुछ ठहरा सा लिखना था, दर्द से ज्यादा क्या लिखूं
कुछ समन्दर सा लिखना था, आंसू से ज्यादा क्या लिखूं
कुछ अपना सा लिखना था, आंखों से ज्यादा क्या लिखूं
कुछ खुशबू सा लिखना था, किरदार से ज्यादा क्या लिखूं
सुनो, अब जिन्दगी लिखनी है, तुमसे ज्यादा क्या लिखूं
तेरे वफ़ा का सिला हर हाल में देंगे
खुदा भी मांगे ये दिल तो टाल देंगे
अगर दिल ने कहा तुम बेवफ़ा हो
तो इस दिल को भी सीने से निकाल देंगे
कोई है जो दुआ करता है
अपनो में मुझे भी गिना करता है
बहुत खुशनसीब समझते है खुद को हम
दूर रहकर भी जब कोई प्यार किया करता है
दस्तक देकर दरवाजे पर छुप जाती है अक्सर
किसी नटखट बच्चे सी है मेरे हिस्से की खुशियां
डाकिए के भेष में आया था वक्त
और इक खाली यादों का लिफ़ाफा दे गया
कुछ यादों पर पहरे है, कुछ घाव बड़े गहरे हैं
कुछ अपनो को मैंने छोड़ा है, कूच जिन्दगी ने भी मुंह मोड़ा है
कुछ यादें हैं जो बहुत सताती है, कुछ मंजिले है जो दूर हो जाती हैं
कुछ मासूम सपनो के गुनहगार हूं, कुछ आंसुओ का भी हकदार हूं
हंसी हंसी में कितनों को हंसा दिया
हंसी हंसी में कितने गमों को छुपा लिया
हंसकर गया कोई हम पर इस कदर
कि उम्र भर के लिए हमें हंसना भुला दिया
इंतजार की आरजू अब को गई है
खामोशियों की आदत हो गई है
न शिकवा रहा न शिकायत किसी से
अगर है तो एक मोहब्बत जो इन तन्हाइयों से हो गई है
चांद निकलेगा तो लोग दुआ मांगेंगे
हम भी अपने मुकद्दर का लिखा मांगेंगे
हम तलबगार नहीं दुनिया की दौलत के
हम रब से सिर्फ़ आपकी वफ़ा मांगेंगे
मेरा साजो श्रृंगार तुम्हीं से है,
चूड़ियों की खनक में खनकते हो
गजरे की खुशबू में महकते हो
आंखों के काजल, पायल की छन छन, कण कण में मेरे हर लम्हें में तुम बसते हो
कभी हाथो की मेंहदी बन महकते हो
तुम मुझमें कभी कानों की झुमकी खनकारी हो, त्यौहार तो सिर्फ़ कुछ पल का तुम हर लम्हें में साथ निभाते हो हमकदम मेरे
जब बढ़ जाती है तन्हाइयां दिल की
तो खुद से ही मुलाकात कर लेते है
हमें किसी शख्स की जरूरत ही नहीं
हम तो आईने से भी बात कर लेते हैं

