चंद लाइनें चंद खयाल
सब लगते बेमिसाल
वो भूले वो सोए
वो शब्दों की माला पिरोए
वो आंखों के तारे
उन्हें ही निहारे
वो ख्वाब वो शबाब
उनका करना यूं आदाब
हर पल वो गुजरे कल
दे न पाए सवालों के हल
वो शमां का उजाला
अपने अंदर है पाला
वो नूर सा चेहरा
हो चांद में जैसे कोई पहरा
मूक के बोल बाधिर सुने कैसे
काले बादलों में चमकता चांद दिखे कैसे
मुस्कुराहट बुरखे के अंदर
सैलाब लाए कैसे खुशी के समंदर
बस हवा अब कर सकती है कोई इशारा
बुर्खे सहित बादल को दे दे कोई किनारा

