धड़कनों खुद पर काबू रखना जब उनसे मुलाक़ात हो
तुम्हारी रफ़्तार मेरी बेकरारी का सबूत न दे दे कहीं
रात को जीत तो नहीं सकता लेकिन ये चिराग़
कम से कम रात की भरपाई बहुत करता है
बचाकर मत रखो अपने आपको दुनियां के तजुर्बे से
ठोकरें भी बेहद जरूरी है जिन्दगी की मूरत तराशने में
खामोशियां तहज़ीब है मोहब्बत की
और वो समझ बैठे कि मुझे बोलना नहीं आता
दोनो ने ही छोड़ दी फिकर
उसने मेरी मैने खुद की
तुम्हे मुझ तक और मुझे तुम तक पहुंचाने के
खुबसूरत एहसास का नाम है शायरी
इश्तिहार ख्वाहिशों का भी जरूरी है
महज़ दिल में रखने से ख्वाहिशें अब मुकम्मल नही होती
कीजे इज़हार ए मोहब्बत चाहे जो अंजाम हो
जिन्दगी में जिन्दगी जैसा कोई तो काम हो
आज वक्त के पन्नों में हिसाब देखा है
शिकवे शिकायतों को बेहिसाब देखा है
कौन कहता है की आइना झूठ नही बोलता
वो सिर्फ़ होठों की मुस्कान देखता है दिल का दर्द नहीं
हर शख्स दौड़ता है यहां भीड़ की तरफ़
फिर ये भी चाहता है कि उसे रास्ता मिले
मेरे चेहरे की हंसी बहुत कुछ बता रही है
मौन मुस्कान कहानी जीवन की सुना रही है
चांद भी अजीब चीज है दोस्तो
बचपन में मामू और जवानी में जानू नजर आता है
तूफ़ान से लड़ने का सलीका है जरूरी
लोग डूबने वालों की हिमायत नहीं करते
कुछ रिश्तों का कभी अंत नहीं होता
चाहे कितनी भी दूरियां हो एहसास खत्म नहीं होता
लिपट कर मुझसे बहुत रोई तमन्नाएं मेरी
खबर थी उनको कि अब दिल से निकाला जाएगा
बात खुबसूरत हो तो लब मुस्कुराने
की वजह नही पूछते हैं
किसका वास्ता देकर रोकता उसे
मेरा तो खुदा भी वही था
नहीं मुमकिन छिपा पाना खुदी को आईने में
कभी आंखें, कभी सांसे, हकीकत बोलती है
ख्यालों से भी रंज है मुझे बेहिसाब
जब मुकम्मल नहीं होते तो आते क्यूं है
असहमति होते हुए भी सहमति के बिंदुओं को खोजना
सुखी रहने का श्रेष्ठ तरीका है
कहते फिरते हो हर किसी से कि हम भूल चुके है उसे
लाओ कभी हौसला खुद को बताने का भी
ए इश्क तेरी भी फरमाइश बड़ी कमाल होती है
तेरा सजदा भी वही होता है, जहां दिल की हार होती है
हल्के हल्के बढ़ रही है चेहरे की लकीरें
नादानी और तजुर्बे का बटवारा हो रहा है

